The Shamans of Nepal

While shamanism exists in different variations worldwide, it shares some common beliefs. These are: spirits exist (can be good or evil); they can communicate with the spirits and they can cure sickness caused by them; they can induce trance-like states to incite visionary ecstasy; and they can tell the future. In Nepal, shamanism is the traditional religion of many ethnic groups in the eastern and western hills. Hinduism and Buddhism have been greatly influenced by shamanistic traditions. Called jhankris, or dhamis, Nepali shamans wear a peacock feather headdress and carry a double-sided drum.They have been defined by some as magico-religious specialists, part herbalists, part priests whose technique is spiritual rather than biological and whose business is to determine the nature of the spirit, and then either to placate it or drive it from the ill person’s body. As healers, they examine animal entrails for signs, collect medicinal plants, perform sacrifices, exorcize demons, and chant magical incantations. Most jhañkris will prescribe medicinal herbs, about which they are very knowledgeable. As soothsayers, they go into trances and act as spokesmen of the gods while as spiritual sentries, they ward off evil spirits and angry ancestors through either greater strength or trickery. They also officiate during funerals, hand out amulets and promulgate myths.

A shamans can be either a kuldhami  or just a dhami-jhankri. The former are believed to be more quickly possessed by the lineage deities while similar possession of dhami-jhankris involves much drumming and the gradual entering of spirits into their bodies. A typical dhami-jhankri’s paraphernalia consists of: a drum (dhyangro), bells around the waist, long necklaces (mala) of rudracche and ritho seeds around the neck and shoulders, a special headdress, and a jama (a long white skirt like garment). The main spirit of the dhami-jhankris is the banjhankri (a spirit inhabiting the nearby forest). Jhankris are also said to counteract the power of witches.

While it is true that dhami-jhankris are regarded with more respect in rural areas, it is also true that even cities like Kathmandu has its fair number of shamans. Even in a city like the Capital with its numerous hospitals, there are many people who prefer to have their ailments treated by shamans or jyoitishis rather than by qualified doctors. While jyotishis (astrologers) are different from shamans, they too claim to deal with common ailments. A Brahmin priest in the Bhairav Nath temple in Lagankhel says, “If it’s a small matter, I can take care of it through some jhar-phuk; but if it’s a complicated case, then one should go to Baglamukhi temple in Patan where one will find a shaman.” One can well imagine, what must be the situation regarding this issue in the villages of the country. As Adrian Storrs says in his book on Jhañkris, “From time immemorial, jhañkris have given medical care to the rural people, Much of the jhañkris’ success is due to the fact that they are well known, respected and accepted, especially as intermediaries between man and spirits. Furthermore, the jhañkris will go to patients at any time and treat them in their homes.” In Nepal, shamans or jhankris can be of any caste; more of them, however, are found to be of Tamang, Gurung, Chhetri or Sherpa ethnicity or caste.

3 thoughts on “The Shamans of Nepal

  1. ‘ “किनभने परमेश्‍वरले संसारलाई यस्‍तो प्रेम गर्नुभयो, कि उहाँले आफ्‍ना एकमात्र पुत्र दिनुभयो, ताकि उहाँमाथि विश्‍वास गर्ने कोही पनि नाश नहोस्, तर त्‍यसले अनन्‍त जीवन पाओस्‌। ‘ यूहन्‍ना 3:16

    ‘“परमेश्वरं संसारयात यक्‍व माया यानादीगुलिं वय्‌कःयात विश्वास याःपिं मनूत नाश मजुइमा, बरु इमित अनन्‍त जीवन दयेमा धकाः थः याकः काय्‌यात तकं बियादिल। ‘ यूहन्‍ना 3:16

    ‘निङ्‌वाॽफुमाङ्‌ङिल्‍ले़ इक्‍सादिङ् खाम्‍बेःक्‍मोबा मे़न्‍छाम् याप्‍मिहाॽ साॽरिक् लुङ्‌माॽ तुक्‍तुसिबाल्‍ले़ चोगुल्‍ले़ खुने़ॽ थिक्‍लक् कुस्‍साःन् पाङ्‌घु युःसुरो, हे़क्‍केलॽरिक् खुने़ॽ नसाःन् के़जोःक्‍पाहाॽग मे़म्‍मे़क्‍ने़न्, कर खे़ङ्‌हाॽरे़ मे़न्‍नुप्‍मनाबा हिङ्‌मन् मे़घोःसुॽरो॥ ‘ युहुन्‍ना 3:16

    “परमपर्‌भुओ आट्‍मा ङा मीटाक ले। हीजैडेनाङ गरीबकोलाक सेछ समचार सेटाक्‍की डेम होसकै ङाकी अभीसेक जाट्‍नने। बन्‍ढनाङ लेच कोलाक फोसाक्‍की र मीमीक माडाङ्‌च कोलाक डाङ्‌च खास्‍की, ठीचोमीचोवाङ पर्‌च कोलाक सोटन्‍ट्‍र जाट्‍कीयो लागी, र परमपर्‌भुओ पर्‌सन्‍नटौ बर्‌स घोसना जाट्‍कीयो नीम्‍टी होसकै ङाकी बीर्‌न्‍ह कामने।” लुका ४:१८-१९

    जम्‍मै भुर्मिकोके भगुवानै साह्रै ना रोमो सेया र मेकुङ कातजा बाबुजा ङाके सन्‍साराङ बिन्‍म्‍हो काचो र सत्‍यनाश नौछान्‍है देमो सु सुई ङा ताकनिं भरोसा मन्‍दीक्‍ले होसेकै अजम्‍बरी ङुके दिन्‍ल्‍हे। यूहन्‍नौ समचार 3:16

  2. उदधार के िलए परमेश्वर का रल उपाय
    मेरे िमत्र: में आप के जीवन की सबसे अिधक आवश्क प्रशन को पूछ रहा हूँ । आप के भिवष्य के जीवन का आनंद या शोक सब इशी पर
    िनभर्र है। प्रशन यह है क्या आप का उदधार हुआ है? इस का अथर् यह नहीं है की आप िकस चचर् की सदस्य है, परन्तु क्या आप का
    उधर हुआ है ? ईश का अथर् यह भी नहीं है की आप िकतने भले हैं, परन्तु क्या आप बच गए हैं? क्या आपको यक़ीन है की मरने के बाद
    आप स्वगर् जायेंगे?
    परमेश्वर कहता ह स्वगर् जाने के िलए आप का पुनजर्न्म आवश्क है | यीशु नीकुदेमुस को यूहन्ना ३:७ में यह कहता है ,” तुम्हे नए िसरे
    से जन्म लेना आवश्क है।”
    परमेश्वर अपने धमर्शास्त्र मे पुनजर्न्म का उपाय बताता है। उसका उपाय सहज है, आप आज उदधार पा सकते हैं। कैसे?
    प्रथम मेरे िमत्र ; आप को यह एहसास करना है की आप एक पापी हैं। (रोिम ३:२३) ….” इसिलए की सब ने पाप िकया और परमेश्वर की
    मिहमा से रिहत हैं।”
    इसिलए की आप एक पापी हैं, आप पर मृत्यू के दंड की आज्ञा है। “क्यों की पाप की मजदूरी तो मृत्यु है” रोिम ६: २३)…. | नरक मैं
    परमेश्वर से हमेशा की जुदाई इसमें शािमल है|
    “और जैसे मनुष्यों के िलए एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना िनयुक्त है।“(इब्रािनयों ९:२७) |
    क्योंिक परमेश्वर ने आप से ऐसा प्रेम रखा िक आपके पाप उठाने और आपके स्थान पर मरने उसने अपना एकलौता पुत्र, येसु, को दे
    िदया ।” जो पाप से अज्ञात था (यीशु, जो पाप नहीं जान ता था), उसी को उस ने हमारे िलये पाप ठहराया, िक हम उस में होकर परमेश्वर
    ी धािमकर् ता बन जाएं॥“ (२ कुरी. ५: २१) ….. |
    येसु को हमरे िलए खून बहा के कृष पर मारना था| “क्योंिक शरीर का प्राण लोहू में रहता है|” (लैव्यवस्था १७:११)| “और िबना लोहू बहाए
    क्षमा नहीं होती।“ (इब्रािनयों ९:२२)|
    “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीित से प्रगट करता है, िक जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे िलये मरा।“(रोिम ५:८)
    आब हम समझ नहीं सकते हैं की कैसे हमारा पाप येशु पर लादा गया था, परन्तु परमेश्वर अपने वचन मैं कहते हैं इसिलए यह सच था। तुम्हारा
    पाप यीशु के ऊपर लादा गया और वह तुम्हारे बदले मर गया। वह हमरा प्रितिनिध बन गया| यह सच है। ईश्वर झूठ बोल ही नहीं सकता है।
    (प्रेिरतों १७:३०) “परमेश्वर ….. हर जगह सब मनुष्योंको मन िफराने की आज्ञा देता है|” मेरे िमत्र; यह पस्च्यताप का मतलब मन पिरवतर्न
    करना होता है िजसमे आप एक पापी है यह मान ना होता है। और यीशु ने हमारे िलए क्रूसपर अपना जीवन दी, यह भी मान ना हो ता है|
    (प्रेिरतों १६:३०- ३१)……िफिलप्पी के जेल दरोगा ने पौलुस और िसलास से पूछा; “हे सािहबो, उदधार पाने के िलए मैं क्या करूँ।” उन्होंने
    कहा, प्रभु यीशु मसीह पर िवस्वास करो तो तू और तेरा घराना उदधार पायेगा । केवल उसपर िवस्वास करो िजशने तुम्हारे पाप उठाया और
    तुम्हारे बदले अपना प्राण दे िदया। अब उसके नाम को लो। जो तुम्हारा पाप उठाया, तुम्हारे स्थान पे मर गया, समािधस्त हुआ और िजसे
    परमेश्वर ने पुनजीर्िबत कया उसपे भरोसा रखो। येसु का पुनजीर्िबत होना एक िवस्वासी जो यीशु को अपना उद्धारक मानता है, उसको
    अन्नत जीवन देता है।
    (यूहन्ना १:१२)………”परन्तुिजतनोंने उसे ग्रहण िकया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अिधकार दे िदया, अयार्त् उन्हें जो उसके
    नाम पर िवस्वास रखते हैं।“
    रोिम १०:१३ …..” क्योंिक जो कोई प्रभु का नाम लेगा वह उद्धार पायेगा ।”
    क्यों की ‘जो कोई’ (इस में तुम भी िमले हो ) प्रभु का नाम लेगा वह उद्धार पायेगा(िनस्चय पायेगा: यह नहीं की शायद पायेगा या और न
    पा सकता है, परन्तु) िनस्चय उद्धार पायेगा ।
    िनिश्चत रूप से तुम को एसास करना है की तुम एक पापी हैं । इशी समय, तुम जहाँ कही भी हो पच्छाताप के साथ अपने हृदय को परमेश्वर
    के समुख प्राथर्ना मे उठाओ।
    लुक १८:१३ में पापी प्राथर्ना करता है…… “हे परमेश्वर मुझ पापी पर दया कर।“ केवल कहो; “ हे परमेश्वर मै एक दुःखी पापी हूँ। मैं
    िवस्वास कर ता हूँ की यीशु मेरे स्थान पर क्रूस पर पर मर गया| मैं िवस्वास करता हूँ की उसका लहू बहा, मृत्यु, समाधी और जी उठना मेरे
    लए था| वह मेरा रक्षक है, यह मे अभी ग्रहण करता हूँ ।पाप क्षमा, रक्षण का उपहार, अन्नंत जीवन और आप का दयालु अनुग्रह के िलए
    मैं आप का धन्यवाद करता हूँ| आमीन|
    केवल परमेश्वर के वचन पर िवस्वास करो और िवस्वास के साथ उसका रक्षण को मांगो । िवस्वास करो तो तू उद्धार पायेगा । न िगरजा
    घर, न सभा घर, न अच्छे काम, न और कु छ परन्तु केवल परमेश्वर तुम को बच्चा सकता है। याद रखो, केवल परमेश्वर उद्धार करता है ।
    उद्धार का सहज उपाय है; तुम एक पापी हो; अगर तुम यीशु के उपर िवस्वास नहीं करोगे तो तुम्हे अनंत काल नरकमें जीवन िबताना पड़ेगा|
    अगर तुम िवस्वास करो की वह तेरा क्रूस पर चढ़ाया, दफनाया गया और पुनजीर्िवत उद्धारक है तो तुम तुम्हारे सारे पापों के िलए क्षमा
    पायगे और अनंत रक्षण का उपहार भी पायोगे|
    तुम कहते हो, “िनस्चय बचने के िलये इतना बस नहीं है।” हो यह बस है। िबलकुल बस है । यह धमर्शास्त्र के अनुसार है यह परमेश्वर
    का उपाय है। मेरे िमत्र, यीशु पर िवस्वास कीिजये और आज ही उसे अपना रक्षक बोलके ग्रहण कीिजये|
    यिद यह पूणर् रूप से स्पष्ट नहीं है, तो इसे उस समय तक बार बार पढ़ो जब तक की तुम इसे भली भांित समझ जाओ। तुम इस परचे को
    अलग न रखो पर पढ़ते जाओ। तुम्हारा आत्मा सारे जगत से अिधक मुल्यवान है।
    मरकुश ८:३६ ….. “ यिद मनुष्य सरे जगत को प्राप्त करे अपनी प्राण की हािन उठए तो उसे क्या लाभ होगा। या मनुष्य अपने प्राण के
    बदले क्या देगा ।”
    तुम अपने उद्धार को िनस्चय करो। यिद तुम अपने आत्मा को नाश करते हो तो तुम स्वगर् और सब कु छ खो देते हो। दया करके परमेश्वर
    को तुझे अभी उधार करने दो ।
    वह यीशु तुम्हे बचाएगा, तुम्हारी रक्षा भी करेगा और तुम्हे एक िवजयी मसीही जीवन जीने के िलए सक्षम भी करेगा। (१ कुिर. १०:१३)…..”
    तुम िकसी ऐसी परीक्षा मे नहीं पड़े जो मनुष्य के सहन से बहार है और परमेश्वर सच्चा है, जो तुम्हे समथर् से बहार परीक्षा मे न पड़ने देगा
    बरन परीक्षा की साथ िवकार भी करेगा की तुम सह सको।”
    तुम अपने िबचारों पर भरोसा भर रखो। वह बदलते रहतें है। परमेश्वर की प्रितज्ञानो पर खड़े हो। वह कभी भी नहीं बदलते है।”
    उद्धार पाने की पस्चात तीन चीज़ें है िजनको तुम्हे प्रित िदन आित्मक िबकास के िलये अभ्यास
    करना है :……
    (१) प्राथर्ना करना …..इस के द्वारा तुम परमेश्वर के साथ बातचीत करते हो।
    (२) धमर्शास्त्र पढ़ना….इसके द्वारा परमेश्वर तुम से बोलता है।
    (३) साक्षी….. इस के द्वारा तुम परमेश्वर के िवशय मै बोलते हो।
    येसु मसीह के आज्ञा का पालन करते हुए आप का बपितस्मा होना चािहए, जो आप का साबर्जिनक रक्षण साक्षी होगा और िबना देर करते
    हुए एक धमर्शास्त्र को मान ने वाला मंडली के साथ एकजुट होइये। “इसिलये हमारे प्रभु की गवाही से लिज्ज़त न हो” (2 तीमुिथयुस १:८)|
    मती १०:३२….” जो कोई मनुष्यों के सामने मुझे मान लेगा उसे मै भी अपने स्वगीर्य िपता के सामने मान लूंगा।
    यिद तुम ने उद्धार पा िलया हे, तो हम लोगों को िनम्निलिखत पते पर समाचार दो की हम भी तुम्हारे साथ आनंद करें। पता:-
    यिद आप खोयें हुओं को बचने मे सहायता करने की अनुरागी हैं तो इस परचे को मँगबाने की व्य्वस्था कीिजये।

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